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प्रिय दोस्तों,
      इतिहास के आईना में, गौतम बुद्ध की तपोभमूमि में, गाॅंधी मैदान की बृक्ष की आड़ में चन्द समर्पित जुझारू साथियों के साथ भारतीय स्टेट बैंक अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जन जाति कर्मचारी कल्याण संघ का बीजारोपण किया गया था। शोषित, दलितों एवं अम्बेदकरवादी विचार धारा के लोग जुटते गये, कारवाॅं बनता गया। छोटा सा पौधा पल्लवित, पुष्पित एवं सुफलित होकर विशाल वरगद का साकार रूप ले लिया जिसकी सेवा की छाया हमारे परिगणित कर्मचारियों को मिलने लगी है। 
कहते है, इतिहास बनता नहीं है, बनाया जाता है। इतिहास बनाने वाला मसीहा आसमान से नहीं, इसी धरती, मिटृी, हवा एवं उर्जा से समाज को बदल देता है, इतिहास रच देता है। एक नया रास्ता एवं स्वरूप देता है। हमारे मौलिक चन्द साथियों ने कल्याण संघ नव-निर्माण की नींव रखी थी, उसी नींव पर हम सभी मिलकर आज कल्याण संघ का भव्य महल तैयार कर दिया है जो आने वाली पीढ़ी दलित सल्तनत के रूप में कल्याण संघ के इतिहास को याद रखेगी।
दोस्तों, कल्याण संघ को इस स्थिति तक लाने में अड़तीस वर्ष वीत गये और हमें पता नहीं चला कि जून 1977 को कुछ साथियों के साथ मिलकर बाबा साहेब भीम राव अम्बेदकर का नाम लेकर भारतीय स्टेट बैंक अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जन जाति कर्मचारी परिषद रूपी पौधा रोपण, आज उसकी छाया इतनी अधिक हो गयी कि दलित समाज के विरोधी संघ की शक्ति देखकर अन्याय करने सेे हिचकते है। जिस समय संगठन खड़ा किया गया था उस समय अनुसूचित जाति, अनुसूचित जन जाति की संख्या बहुत कम थी। समय के साथ संगठन का सघर्ष जारी रहा तथा आरक्षण नीति के तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जन जाति कर्मचारीयों की संख्या बढ़ती गयी।
वर्ष 1979 के पहले पदोन्नती में कोई आरक्षण नही था, संघ के कड़े संघर्ष के बाद 1979 से पदोन्नति में आरक्षण लागु किया गया। संघ के सम्मानित एवं समर्पित सदस्यों की चटृानी एकता, दृढ़ संकल्प, हक-हकूक की जज्बा, संवैधानिक अधिकार की सजगता तथा नेतृत्व में विश्वास के बदौलत संघ इस मुकाम पर पहॅंूचा है कि संविधान प्रदत् आरक्षण एवं रियायत का अधिकार एवं सदस्यों के कल्याणार्थ की बातें प्रबन्धन ध्यान से एवं गम्भीरता से लेता है और नियम एवं नीति के तहत मदद करता है। इस प्रकार अनेकों वार विशेष अभियाण के तहत नियुक्ति एवं पदोन्नति हुई जो आज भारतीय स्टेट बैंक, पटना सर्किल में पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों की संख्या लगभग है वर्ष 1977 से आज तक संघ एवं संघ के पदाधिकारियों में काफी बदलाव होता रहा है। पूर्व में संघ के अनेको पदाधिकारियों को पदोन्नति के उपरान्त स्थानान्तरण होते रहा जिससे संघ के कार्य में कमी आती रही फिर भी हम हतोत्साहित नहीं हुए और संघ का कार्य संघर्षशील सदस्यों के बदौलत निष्ठापूवर््क चलता रहा। वर्ष 1979 में अखिल भारतीय ;स्टेट बैंक समूहद्ध अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जन जाति कर्मचारी कल्याण महासंघ का निर्माण हुआ और भोपाल में पंजियण कराया गया। वर्ष 1980-81 से उक्त महासंघ के नाम से एक यूनिट की भाॅंति संवैधानिक तरीके से सदस्यों की समस्याओं का निपटारा कराया जाता रहा। वर्ष 1983 में अखिल भारतीय ;स्टेट बैंक समूहद्ध अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जन जाति कर्मचारी कल्याण महासंघ, भोपाल के केन्द्रीय समिति ने स्टेट बैंक समूह को विस्तार रूप इेने के उदे्श्य से महासंघ का नाम बदल कर अखिल भारतीय अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जन जाति कर्मचारी महासंघ, बैंकिंग इन्डस्ट्ीज के नाम से पंजीकृत करवाने हेतु संबंधित विभाग में पहल किया एवं पुराने महासंघ के बैनर को बन्द कर भारतीय स्टेट बैंक अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जन जाति कर्मचारी कल्याण परिषद जो शुरूआती दौर से पटना सर्किल में गठन किया गया था, के नाम से संघ चलाने का सुझाव दिया। वर्ष 1983 में भारतीय स्टेट बैंक में कार्यरत सभी सर्किल के संघ पदाधिकारियों ने राष्ट्ीय स्तर का फेडरेशन बनाया जिसका नामकरण नेशनल फेउरेशन आॅंफ एस0 बी0 आई0 एस0 सी0/एस0 टी0 इम्पलाईज हुआ एवं इसी से सम्बद्व कर प्रत्येक सर्किल में, चाहे सर्किल में जिस नाम से संध रहा हो, सदस्यों के अधिकारों को दिलाने का प्रयास किया। स्थानीय स्तर पर पंजियन कराने की प्रत्याशा में पुराने महासंघ के बैनर पर ही सदसयों की संवैधानिक अधिकार को दिलाने हेतु प्रयास जारी रहा। दिनांक 13.05.2001 को साहु जैन हाॅंल में आम-सभा हुई। अन्य प्रस्तावना के साथ ही सर्व सम्मति से निर्णय लिया गया कि स्थानीय स्तर पर कल्याण संघ को पंजीकृत कराया जाय जिसके लिए महासचिव को कार्यभार सौंपा एवं अधिकृत भी किया गया। पूरे भारतवर्ष में एक नाम का संगठन भारतीय स्टेट बैंक अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जन जाति कर्मचारी कल्याण संघ का नामकरण किया गया एवं पंजियन हेतु आवश्यक फार्म एवं नियमावली का प्रबन्ध कर औपचारिकता हेतु दिनांक 01.02.2003 को एक स्थानीय सदस्यों की आम सभा हुई तदनुसार पंजियन हेतु प्रस्तुत की गई जिसकी पंजीयन सं0 680 वर्ष 2003-2004 है। पंजीयन संघ के वैनर तले सदस्यों की समस्या एवं अन्य सामाजिक कार्य किया जा रहा है। यही इस कल्याण संघ ;सेवाद्ध की ऐतिहासिक पृष्टभूमि है।
भारतीय स्टेट बैंक अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जन जाति कर्मचारी कल्याण संघ के दर्शन ;टपेपवदद्ध लक्ष्य ;डपेेपवदद्ध एवं मूल्य ;टंसनमद्ध
दर्शन ;टपेपवदद्ध भारतीय स्टेट बैंक अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जन जाति कर्मचारी कल्याण संघ दलितों शोषितों एवं अम्बेदकरवादी विचाारधारा के विकास हेतु शिक्षित बनों, संगठित रहों एवं संघर्ष करो के प्रति अभिप्रेरित करने वाली निरंतर चलती रहने वाली प्रक्रिया का अभिन्न अंग है। इसका उद्ेश्य है, संविधान प्रदत्त अधिकारों की जानकारी देना, अपनी संस्था के प्रति निष्ठावान एवं समर्पित होना तथा संवैधानिक प्रदत्त अधिकारों के हनन को संगठित होकर विरोध करना।
लक्ष्य ;डपेेपवदद्ध परिगणित जातियों की पारस्परिक विचाार शीलता प्रतिवद्धता की संस्कृति जातिगत भावनाओं से सदस्यों का शोषण संवैधानिक अधिकार हनन के प्रति सजगता, अपने सदस्यों का संरक्षण, अम्बेदकर विचाार-धारा को विस्तारशील तथा अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जन जाति को एक सूत्र में बाॅंधने में अपनी अग्रणी भूमिका का निर्वाह करना तथा स्वावलम्बी बनाना।
मूल्य 

1. संघ के प्रति सजग एवं सचेत रहना।
2. सदस्यों को चटृानी एकता बनाये रखना।
3. संघ के नीतियों एवं पद्धतियों में अनुशासन एवं पारदर्शिता रखना।
4. संघ में हमेशा सहयोग की भावना रखना।
5. नेतृत्व के प्रति ईमानदार एवं समर्पित होना।
6. संघ में पदाधिकारी को सेवा-भाव, समर्पण, अनुभव तथा ज्ञानोन्मुख होना।
7. सभी संबन्धों एवं कार्यो में निष्पक्षता एवं सहयोग की भावना से कार्य करना।
8. प्रबन्धन, सम्मानित सदस्यों एवं फेडरेशन में सेतु सा समन्यक की भूमिका निभाना।
9. उत्कृष्ट सदस्य सेवा एवं नियम-नीति में नवोन्मेषी होना।


सेवा पटना के वेवसाइट पर सुस्वागतम


भारतीय स्टेट बैंक अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जन जाति कर्मचारी कल्याण संघ ;सेवाद्ध का बीजारोपण 1977 में कुछ समर्पित अम्बेदकरवादी साथियोें द्वारा किया गया। शोषित, दलित, अम्बेदकरवादी विचाार धारा के लोग जुटते गये, कारवाॅं बनता गया। छोटा सा पौधा का किसलय पल्लवित, पुष्पित एवं सुफलित होकर विशाल बरगद का साकार स्वरूप ले चुका है। 
कल्याण संघ का 38 वर्ष पुरा हो जाना संघ के लिए गौरव की बात है, एक मिल का पत्थर हैं हमारा संघ सेवा के रोग से ग्रसित है, जरूरतमंदो के जादू में गिरफ्तार है और यही जादू न थकने देता है। कल्याण संघ किसी का हक नहीं छीनता अपितु प्रबन्धन से उन्हीं माॅंगो को साग्रह माॅंग करता है जो संविधान प्रदत्त हैं। हमारा नेतृत्व संवैधानीक शक्तिायों, आयोग संरक्षण एवं माननीय न्यायालय के निगाहवान के वावजूद मिल बैठकर सौहाद्र वातावरण में समस्याओं का समाधान में विश्वास रखता है। मैंने कल्याण संघ के फर्श से अर्श तक संघर्षमय सफर देखा हैं मैंने गाॅंधी मैदान के झुड़मुट की ओट में चन्द अम्बेदकरवादी साथियों की आॅंखों में जिद एवं जनून देखा है एवं संघर्ष, त्याग तथा तपस्या का साक्षी हैं हमारी कड़ी मेहनत एवं समर्पित सदस्यों की एकता आज वातानुकूल सेवा कार्यालय में संघ का वेवसाइट का शुभारंभ होते देख रहा हूॅंॅॅ। दोस्तों, सामाजिक आदर्श, राजनैतिक हलचल, नैतिक चर्चा जगत की जानकारी हजारों मनुष्यों की जरूरत एवं रूचि के ख्यालों से बनायी एवं निश्चित की जाने वाली वस्तुएॅं है। आज सूचना एवं प्राद्यौगिक के युग में परिर्वतन शीलता एवं प्रतिस्पर्धा के दौर में तथा संघ एवं संगठन स्वरूप में हमें अपने आप को बदलना ही पड़ेगा अन्यथा हम जिन्दगी के दौर में पीछे छूट जाॅंयेगे। वेवसाइट इसी सोच का हिस्सा है। 
कल्याण संघ बैंक प्रबन्धन के आभारी है कि हमारी मानवीय संवेदनाओं को अपने संसाधन विभाग में विशेष जगह दी हैं। अब विश्वास के साथ कह सकते है, कल्याण संघ के सदस्य बैंक परिवार के अभिन्न अंग हैं। 
मैं अपने कल्याण संघ के महासचिव एवं राष्ट्ीय अध्यक्ष श्री सुरेश कुमार का विशेष रूप से आभारी है जिन्हांेने ब्यक्तिगत रूची लेकर मुझे वेवसाइट बनवाने की विशेष जिम्मेवारी दी। वर्षो से मेरा सपना था कि सूचना एवं प्राद्यौगिक के युग में संघ का अपना वेवसाइट हो, सब साथ मिलकर चलें, त्वरित गति से सदस्यों को सम्पूर्ण जानकारियाॅं प्राप्त हो, सामुहिक नेतृत्व हो तथा अपनों में पारदर्शिता हो। आज भी बहुत सारे सदस्य है जिनको पता नहीं है कि उनका अधिकार क्या हैघ् कत्र्तब्य क्या हैघ् तथा कल्याण संघ के प्रति जिम्मेवारी क्या हैघ्  आशा है यह वेवसाइट हमारे सम्मानित सदस्यों के लिए अलाद्धीन के जादूई चिराग साबित होगा। हम एक दूसरे के करीब होंगे तथा हमारी एकता एक चटृानी एकता के पर्याय बनेगी ।
शुभ कामनाओं के साथ।


 

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